बौध्द दर्शन साफ़ कहता हैं, की हरेक अच्छा या बुरा काम हाथ से छूटा हुआ तीर हैं. करने के साथ ही वह जीवन को अपनी रुप में बदल देता हैं. हरके जीवन अपने अतीत के अनन्त काल के कर्मों के प्रभावों का योग हैं. इस योग को करने के लिए किसी बाहरी देवता या साधन की अवश्यकता नहीं. जीस तरह बहती हुई जल-प्रणाली में लगातार पड़ते हुए रंग उसे तत्काल अपने रुप में रंगते जाते हैं, वही स्थिति जीवन की हैं.
Thursday, November 28, 2019
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सौन्दरनन्द-महाकाव्य, आज्ञा-व्याकरण, सर्ग १८
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कर्म कैसे कार्य करता है? कर्म का सिद्धांत अत्यन्त गहन है इसलिए इसे समझना आसान नहीं होता। कर्म शब्द का अलग-अलग धर्मों में अलग-अलग अर्थ है और ...
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